एक बार भरि मकर नहाए

चौपाई २, दोहा ४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए॥ जागबलिक मुनि परम बिबेकी। भरद्वाज राखे पद टेकी॥ २ ॥

अर्थ

एक बार पूरे मकर भर स्नान करके सब मुनीश्वर अपने-अपने आश्रमों को लौट गये। परम ज्ञानी जागबलिक मुनि को चरण पकड़कर भरद्वाजजी ने रख लिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।

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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य