एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं

चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं॥ प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा॥ १ ॥

अर्थ

इसी प्रकार माघ भर स्नान करते हैं और फिर सब अपने-अपने आश्रमों को चले जाते हैं। हर साल वहाँ इसी तरह बड़ा आनन्द होता है। मकर में स्नान करके मुनिगण चले जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।

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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य