एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई

चौपाई १, दोहा ११८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई॥ जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई॥ १ ॥

अर्थ

इसी तरह यह संसार भगवान् के आश्रित रहता है। यद्यपि यह असत्य है, तो भी दुःख तो देता ही है; जिस तरह स्वप्न में कोई सिर काट ले तो बिना जागे वह दुःख दूर नहीं होता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद