एहि बिधि भलेहिं देवहित होई
एहि बिधि भलेहिं देवहित होई
चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि भलेहिं देवहित होई। मत अति नीक कहइ सबु कोई॥ अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू॥ ४ ॥
अर्थ
इस प्रकार से भले ही देवताओं का हित हो [और तो कोई उपाय नहीं है] सबने कहा—यह सम्मति बहुत अच्छी है। फिर देवताओं ने बड़े प्रेम से स्तुति की, तब विषम (पाँच) बाण धारण करनेवाला और मछली के चिह्नयुक्त ध्वजवाला कामदेव प्रकट हुआ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती