ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें

चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें। द्वापर परितोषत प्रभु पूजें॥ कलि केवल मल मूल मलीना। पाप पयोनिधि जन मन मीना॥ २ ॥

अर्थ

पहले (सतयुग) में ध्यान से, दूसरे (त्रेता) युग में यज्ञ से और द्वापर में पूजन से भगवान् प्रसन्न होते हैं; परंतु कलियुग केवल पाप की जड़ और मलिन है, इसमें मनुष्यों का मन पापरूपी समुद्र में मछली बना हुआ है (अर्थात् पाप से कभी अलग होना ही नहीं चाहता; इससे ध्यान, यज्ञ और पूजन नहीं बन सकते)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा