धरनि धरहि मन धीर कह बिरंचि

सोरठा १८४ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

धरनि धरहि मन धीर कह बिरंचि हरि पद सुमिरु। जानत जन की पीर प्रभु भंजिहि दारुन बिपति॥ १८४ ॥

अर्थ

ब्रह्माजी ने कहा--हे धरती! मन में धीरज धारण करके श्रीहरि के चरणों का स्मरण करो। प्रभु अपने दासों की पीड़ा जानते हैं, ये तुम्हारी दारुण विपत्ति का नाश करेंगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पृथ्वी और देवताओं की करुण पुकार” प्रकरण का सोरठा १८४ है। इस प्रकरण में रावण के अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी और देवताओं की भगवान से करुण प्रार्थना एवं ब्रह्मा की स्तुति का वर्णन है।

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पृथ्वी और देवताओं की करुण पुकार