धनिक बनिक बर धनद समाना
धनिक बनिक बर धनद समाना
चौपाई २, दोहा २१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठे सकल बस्तु लै नाना॥ चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई॥ २ ॥
अर्थ
कुबेर के समान श्रेष्ठ धनी व्यापारी सब प्रकार की अनेक वस्तुएँ लेकर [दूकानों में] बैठे हैं। सुन्दर चौराहे और सुहावनी गलियाँ सदा सुगन्ध से सिंची रहती हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।
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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश