देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं
देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं
चौपाई ४, दोहा ३१७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं॥ मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी॥ ४ ॥
अर्थ
सभी देवता देवराज इन्द्र से ईर्ष्या कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आज इन्द्र के समान भाग्यवान् दूसरा कोई नहीं है। श्रीरामचन्द्रजी को देखकर देवगण प्रसन्न हैं और दोनों राजाओं के समाज में विशेष हर्ष छा रहा है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत