देव एकु गुनु धनुष हमारें
देव एकु गुनु धनुष हमारें
चौपाई ४, दोहा २८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें॥ सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे॥ ४ ॥
अर्थ
हे देव! हमारे तो एक ही गुण धनुष है और आपके परम पवित्र [शम, दम, तप, शौच, क्षमा, सरलता, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिकता-ये] नौ गुण हैं। हम तो सब प्रकार से आपसे हारे हैं। हे विप्र! हमारे अपराधों को क्षमा कीजिए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद