देखि प्रीति सुनि बचन अमोले

चौपाई १, दोहा १५० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले॥ आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई॥ १ ॥

अर्थ

राजा की प्रीति देखकर और उनके अमूल्य वचन सुनकर करुणानिधान भगवान् बोले-ऐसा ही हो। हे राजन्! मैं अपने समान [दूसरा] कहाँ जाकर खोजूँ। अतः स्वयं ही आकर तुम्हारा पुत्र बनूँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान