देखी जनक भीर भै भारी

चौपाई ४, दोहा २४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी॥ तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहु सब काहू॥ ४ ॥

अर्थ

जब जनकजी ने देखा कि बड़ी भीड़ हो गयी है, तब उन्होंने सब विश्वासपात्र सेवकों को बुलवा लिया और कहा-तुरत सब लोगों के पास जाओ और सब किसी को यथायोग्य आसन दो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद