चरन सरोज धूरि धरि सीसा

चौपाई ४, दोहा ३३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा॥ सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना॥ ४ ॥

अर्थ

उनके चरणकमलों की धूलि सिर पर धरकर और आशिष पाकर राजा आनन्दित हुए और गणेशजी का स्मरण करके उन्होंने प्रस्थान किया। मंगलमूल अनेक शकुन हुए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह