चली बरात निसान बजाई
चली बरात निसान बजाई
चौपाई ४, दोहा ३४३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई॥ रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी॥ ४ ॥
अर्थ
डंका बजाकर बारात चली। छोटे-बड़े सभी समुदाय प्रसन्न हैं। गाँवों के स्त्री-पुरुष श्रीरामचन्द्रजी को देखकर नेत्रों का फल पाकर सुखी होते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना