बोलि सकल सुर सादर लीन्हे
बोलि सकल सुर सादर लीन्हे
चौपाई १, दोहा १०० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे॥ बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी॥ १ ॥
अर्थ
सब देवताओं को आदर सहित बुला लिया और सबको यथायोग्य आसन दिये। वेदी वेद-विधान से सजायी गयी और स्त्रियाँ सुन्दर मंगलगीत गाने लगीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात