बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता

चौपाई ४, दोहा ९२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता॥ सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा॥ ४ ॥

अर्थ

विष्णु और ब्रह्मा आदि देवताओं के समूह अपने-अपने वाहनों पर चढ़कर बरात में चले। देवताओं का समाज सब प्रकार से अनुपम था, पर दूल्हे के योग्य बरात न थी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास