बिनय सील करुना गुन सागर
बिनय सील करुना गुन सागर
चौपाई २, दोहा २८५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर॥ सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा॥ २ ॥
अर्थ
हे विनय, शील, करुणा आदि गुणों के समुद्र और वचनों की रचना में अत्यन्त चतुर! आपकी जय हो। हे सेवकों को सुख देने वाले, सब अंगों से सुन्दर और शरीर में करोड़ों कामदेवों की छबि धारण करने वाले! आपकी जय हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद