भूप प्रतापभानु बल पाई

चौपाई १, दोहा १५५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई॥ सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी॥ १ ॥

अर्थ

राजा प्रतापभानु का बल पाकर भूमि सुन्दर कामधेनु (मनचाही वस्तु देने वाली) हो गयी। [उनके राज्य में] प्रजा सब [प्रकार के] दुःखों से रहित और सुखी थी, और सभी स्त्री-पुरुष सुन्दर और धर्मात्मा थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा