भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह
भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह
दोहा ३०७ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह समेत। उठे हरषि सुखसिंधु महुँ चले थाह सी लेत॥ ३०७ ॥
अर्थ
जब राजा दशरथजी ने पुत्रों सहित मुनि को आते देखा, तब वे हर्षित होकर उठे और सुख के समुद्र में थाह-सी लेते हुए चले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३०७ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत