भूप भरत पुनि लिए बोलाई

चौपाई १, दोहा २९८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई॥ चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता॥ १ ॥

अर्थ

फिर राजा ने भरतजी को बुला लिया और कहा कि जाकर घोड़े, हाथी और रथ सजाओ, जल्दी रामचन्द्रजी की बारात में चलो। यह सुनते ही दोनों भाई (भरतजी और शत्रुघ्नजी) आनन्दवश पुलक से भर गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान