भूप बचन सुनि सहज सुहाए

चौपाई १, दोहा ३५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भूप बचन सुनि सहज सुहाए। जरित कनक मनि पलँग डसाए॥ सुभग सुरभि पय फेन समाना। कोमल कलित सुपेतीं नाना॥ १ ॥

अर्थ

राजा के वचन सुनकर [रानियों ने] स्वभाव से ही सुन्दर [शय्याएँ] सजाईं। मणि-जटित सुवर्ण के पलँग बिछवाये। गौ के दूध के फेन के समान सुन्दर और कोमल अनेकों सफेद चादरें बिछायीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना