बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा

चौपाई ४, दोहा २८० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृपु ढोटा॥ बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं॥ ४ ॥

अर्थ

इसको शीघ्र ही आँखों की ओट क्यों नहीं करते? यह राजपुत्र देखने में छोटा है, पर है बड़ा खोटा। लक्ष्मणजी ने हँसकर मन-ही-मन कहा--आँख मूँद लेने पर कहीं कोई नहीं है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद