बर अनुहारि बरात न भाई
बर अनुहारि बरात न भाई
चौपाई १, दोहा ९३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई॥ बिष्नु बचन सुनि सुर मुसुकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने॥ १ ॥
अर्थ
हे भाई! हमारी यह बरात वर के योग्य नहीं है। क्या पराये नगर में जाकर हँसी कराओगे? विष्णु भगवान् की बात सुनकर देवता मुसकराये और वे अपनी-अपनी सेना सहित अलग हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास