बंदउँ नाम राम रघुबर को
बंदउँ नाम राम रघुबर को
चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥ बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥ १ ॥
अर्थ
मैं श्रीरघुनाथजी के नाम 'राम' की वन्दना करता हूँ, जो कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) का हेतु अर्थात् 'र', 'आ' और 'म' रूप से बीज है। वह रामनाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप है। वह वेदों का प्राण है; निर्गुण, उपमारहित और गुणों का भण्डार है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा