बन बहु बिषम मोह मद माना
बन बहु बिषम मोह मद माना
चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना॥ ५ ॥
अर्थ
मोह, मद और मान ही बहुत-से बीहड़ वन हैं और नाना प्रकार के कुतर्क ही भयानक नदियाँ हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य