बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा
बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा
चौपाई १, दोहा २०३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा॥ कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई॥ १ ॥
अर्थ
भगवान् ने बहुत प्रकार से बाललीलाएँ कीं और अपने सेवकों को अत्यन्त आनन्द दिया। कुछ समय बीतने पर सब भाई बड़े भए परिजन सुखदाई।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला