बाहन अपर अनेक बिधाना
बाहन अपर अनेक बिधाना
चौपाई २, दोहा ३०० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना॥ तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृंदा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा॥ २ ॥
अर्थ
सुन्दर पालकियाँ, सुखासन और रथ आदि और भी अनेकों प्रकार की सवारियाँ हैं। उन पर श्रेष्ठ ब्राह्मणों के समूह चढ़कर चले, मानो सब वेदों के छन्द ही शरीर धारण किये हुए हों।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान