आवत जानि भानुकुल केतू

चौपाई ३, दोहा ३०४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू॥ बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए॥ ३ ॥

अर्थ

सूर्यवंश के पताकास्वरूप दशरथजी को आते हुए जानकर जनकजी ने नदियों पर पुल बँधवा दिये। बीच-बीच में ठहरने के लिये सुन्दर घर (पड़ाव) बनवा दिये, जिनमें देवलोक के समान सम्पदा छायी है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान