अवसि काज मैं करिहउँ तोरा
अवसि काज मैं करिहउँ तोरा
चौपाई २, दोहा १६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अवसि काज मैं करिहउँ तोरा। मन तन बचन भगत तैं मोरा॥ जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ॥ २ ॥
अर्थ
मैं तुम्हारा काम अवश्य करूँगा; [ क्योंकि] तुम मन, वाणी और शरीर [तीनों] से मेरे भक्त हो। पर योग, युक्ति, तप और मन्त्र का प्रभाव तभी फलीभूत होता है जब वे छिपाकर किये जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा