अति रिस बोले बचन कठोरा

चौपाई २, दोहा २७० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥ बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू॥ २ ॥

अर्थ

अत्यन्त क्रोध में भरकर वे कठोर वचन बोले-रे मूर्ख जनक! बता, धनुष किसने तोड़ा? उसे शीघ्र दिखा, नहीं तो अरे मूढ़! आज मैं जहाँ तक तेरा राज्य है, वहाँ तक की पृथ्वी उलट दूँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना