अति गहगहे बाजने बाजे

चौपाई १, दोहा २८६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे॥ जूथ जूथ मिलि सुमुखि सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनीं॥ १ ॥

अर्थ

खूब जोर से बाजे बजने लगे। सभी ने मनोहर मंगल-साज सजे। सुन्दर मुख और सुन्दर नेत्रों वाली तथा कोयल के समान मधुर बोलने वाली स्त्रियाँ झुंड-झुंड मिलकर सुन्दर गान करने लगीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद