अति बिनीत मृदु सीतल बानी

चौपाई १, दोहा २७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥ सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी दोनों हाथ जोड़कर अत्यन्त विनय के साथ कोमल और शीतल वाणी बोले-- हे नाथ! सुनिए, आप तो स्वभाव से ही सुजान हैं। आप बालक के वचन पर कान न कीजिए (उसे सुना-अनसुना कर दीजिए)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद