अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित

दोहा २११ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित दयाल। तुलसिदास सठ तेहि भजु छाड़ि कपट जंजाल॥ २११ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ऐसे दीनबंधु और बिना ही कारण दया करने वाले हैं। तुलसीदासजी कहते हैं, हे शठ [मन]! तू कपट-जंजाल छोड़कर उन्हीं का भजन कर।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “अहल्या उद्धार” प्रकरण का दोहा २११ है। इस प्रकरण में श्रीराम के चरणस्पर्श से अहल्या के शापमुक्ति और उनकी भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।

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अहल्या उद्धार