यह सुधि गुहँ निषाद जब पाई

चौपाई १, दोहा ८८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

यह सुधि गुहँ निषाद जब पाई। मुदित लिए प्रिय बंधु बोलाई॥ लिए फल मूल भेंट भरि भारा। मिलन चलेउ हियँ हरषु अपारा॥ १ ॥

अर्थ

जब निषादराज गुह ने यह खबर पायी, तब आनन्दित होकर उसने अपने प्रियजनों और भाई-बन्धुओं को बुला लिया और भेंट देने के लिये फल, मूल (कन्द) लेकर और उन्हें भारों (बहँगियों) में भरकर मिलने के लिये चला। उसके हृदय में हर्ष का पार नहीं था।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शृंगवेरपुर में निषादराज गुह द्वारा श्रीराम की प्रेमपूर्ण सेवा और भक्तिपूर्ण स्वागत का वर्णन है।

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शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा