तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम
तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम
दोहा २०८ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु। राम भगति रस सिद्धि हित भा यह समउ गनेसु॥ २०८ ॥
अर्थ
हे भरत! तुम्हारे लिए (तुम्हारी समझ में) यह कलंक है, पर हम सबके लिए तो उपदेश है। श्रीरामभक्ति रस की सिद्धि के लिए यह समय गणेशजी की कृपा से बड़ा शुभ हुआ है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का दोहा २०८ है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद