तेहि अवसर एक तापसु आवा
तेहि अवसर एक तापसु आवा
चौपाई ४, दोहा ११० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा॥ कबि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी॥ ४ ॥
अर्थ
उसी अवसर पर वहाँ एक तपस्वी आया, जो तेजपुंज, छोटी अवस्था का और सुन्दर था। उसकी गति कवियों को नहीं मालूम [अथवा वह तपस्वी था जो अपना परिचय नहीं देना चाहता]। वह वैरागी के वेष में था और मन, वचन तथा कर्म से श्रीरामचन्द्रजी का अनुरागी था।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वन मार्ग में तापस से भेंट” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वन मार्ग में एक तेजस्वी तापस और श्रीराम के मिलन तथा भक्ति-प्रेम के प्रकटन का वर्णन है।
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वन मार्ग में तापस से भेंट