ते अब फिरत बिपिन पदचारी
ते अब फिरत बिपिन पदचारी
चौपाई २, दोहा २०१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
ते अब फिरत बिपिन पदचारी। कंद मूल फल फूल अहारी॥ धिग कैकई अमंगल मूला। भइसि प्रान प्रियतम प्रतिकूला॥ २ ॥
अर्थ
वही श्रीरामचन्द्रजी अब जंगलों में पैदल फिरते हैं और कन्द-मूल तथा फल-फूलों का भोजन करते हैं। अमंगल की मूल कैकेयी को धिक्कार है, जो अपने प्राणप्रियतम के प्रतिकूल हो गयी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन