तात तात बिनु बात हमारी

चौपाई ३, दोहा ३०५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरकुल कृपाँ सँभारी॥ नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू॥ ३ ॥

अर्थ

है तात! पिताजी के बिना हमारी बात केवल गुरुकुल की कृपा से ही सँभाली है; नहीं तो हमारे समेत प्रजा, परिजन, परिवार सभी बर्बाद हो जाते।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद