तापस मुनि महिसुर सुनि देखी

चौपाई ३, दोहा २९२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी॥ समउ समुझि धरि धीरजु राजा। चले भरत पहिं सहित समाजा॥ ३ ॥

अर्थ

तपस्वी, मुनि और ब्राह्मण यह सब सुन और देखकर प्रेमवश बहुत ही व्याकुल हो गये। समय का विचार करके राजा जनकजी धीरज धरकर समाज सहित भरतजी के पास चले।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक-वसिष्ठ संवाद, इन्द्र की चिंता और सरस्वती द्वारा उनके संशय-निवारण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना