तदपि करहिं सम बिषम बिहारा
तदपि करहिं सम बिषम बिहारा
चौपाई ३, दोहा २१९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा॥ अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस॥ ३ ॥
अर्थ
तथापि वे भक्त और अभक्त के हृदय के अनुसार सम और विषम व्यवहार करते हैं (भक्त को प्रेम से गले लगा लेते हैं और अभक्त को मारकर तार देते हैं)। गुणरहित, निर्लेप, मानरहित और सदा एकरस भगवान् श्रीराम भक्त के प्रेमवश ही सगुण हुए हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “इन्द्र-बृहस्पति संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इन्द्र की चिंता पर बृहस्पति द्वारा भरत-भक्ति की महिमा और राम-स्वभाव का उपदेश का वर्णन है।
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इन्द्र-बृहस्पति संवाद