तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए

चौपाई १, दोहा ८३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए॥ चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई॥ १ ॥

अर्थ

तब (वहाँ पहुँचकर) सुमन्त्र ने राजा के वचन श्रीरामचन्द्रजी को सुनाये और विनती करके उनको रथ पर चढ़ाया। सीताजी सहित दोनों भाई रथ पर चढ़कर हृदय में अयोध्या को सिर नवाकर चले।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।

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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना