चलत रामु लखि अवध अनाथा

चौपाई २, दोहा ८३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चलत रामु लखि अवध अनाथा। बिकल लोग सब लागे साथा॥ कृपासिंधु बहुबिधि समुझावहिं। फिरहिं प्रेम बस पुनि फिरि आवहिं॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी को जाते हुए और अयोध्या को अनाथ [होते हुए] देखकर सब लोग व्याकुल होकर उनके साथ हो लिये। कृपासिंधु श्रीरामजी उन्हें बहुत तरह से समझाते हैं, तो वे [अयोध्या की ओर] लौट जाते हैं; परन्तु प्रेमवश फिर लौट आते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।

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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना