तब सेवकन्ह सरस थलु देखा

चौपाई ३, दोहा ३१० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। कीन्ह सुजल हित कूप बिसेषा॥ बिधिबस भयउ बिस्व उपकारू। सुगम अगम अति धरम बिचारू॥ ३ ॥

अर्थ

तब [भरतजी के] सेवकों ने उस जलयुक्त स्थान को देखा और उस सुन्दर [तीर्थों] के जल के लिये एक खास कुआँ बना लिया। दैवयोग से विश्वभर का उपकार हो गया। धर्म का विचार जो अत्यन्त अगम था, वह [इस कूप के प्रभाव से] सुगम हो गया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।

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भरत का तीर्थ जल स्थापन