स्वारथु नाथ फिरें सबही का
स्वारथु नाथ फिरें सबही का
चौपाई ३, दोहा २६८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका॥ यह स्वारथ परमारथ सारू। सकल सुकृत फल सुगति सिंगारू॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! आपके लौटने में सभी का स्वार्थ है, और आपकी आज्ञा पालन करने में करोड़ों प्रकार से कल्याण है। यही स्वार्थ और परमार्थ का सार है, समस्त पुण्यों का फल और सम्पूर्ण शुभ गतियों का शृंगार है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।
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श्रीराम-भरतादि का संवाद