स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर
दोहा १९४ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात। रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात॥ १९४ ॥
अर्थ
मूर्ख और पामर चाण्डाल, शबर, खस, यवन, जड़, पावँर, कोल और किरात भी राम नाम कहते ही परम पवित्र और त्रिभुवन में विख्यात हो जाते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का दोहा १९४ है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन