सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही

चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही। तव प्रभाउ जग बिदित न केही॥ लोकप होहिं बिलोकत तोरें। तोहि सेवहिं सब सिधि कर जोरें॥ ३ ॥

अर्थ

हे रघुवीरकी प्रियतमा जानकी ! सुनो, तुम्हारा प्रभाव जगत् में किसे नहीं मालूम है? तुम्हारे [कृपादृष्टिसे] देखते ही लोग लोकपाल हो जाते हैं। सब सिद्धियाँ हाथ जोड़े तुम्हारी सेवा करती हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “केवट का प्रेम और गंगा पार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारने और श्रीराम-सीता-लक्ष्मण को गंगा पार उतारने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
केवट का प्रेम और गंगा पार