सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने
सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने
चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने॥ तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा॥ १ ॥
अर्थ
मुनि के वचन सुनकर, उनकी भाव-भक्ति के कारण आनन्द से तृप्त हुए भगवान् श्रीरामचन्द्रजी [लीला की दृष्टि से] सकुचा गये। तब [अपने ऐश्वर्य को छिपाते हुए] श्रीरामचन्द्रजी ने भरद्वाज मुनि का सुन्दर सुयश करोड़ों प्रकार से कहकर सबको सुनाया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।
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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट