सो बड़ सो सब गुन गन

चौपाई २, दोहा १०८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सो बड़ सो सब गुन गन गेहू। जेहि मुनीस तुम्ह आदर देहू॥ मुनि रघुबीर परसपर नवहीं। बचन अगोचर सुखु अनुभवहीं॥ २ ॥

अर्थ

उन्होंने कहा-- हे मुनीश्वर! जिसको आप आदर दें, वही बड़ा है और वही सब गुणसमूहों का घर है। इस प्रकार श्रीरामजी और मुनि भरद्वाजजी दोनों परस्पर विनम्र हो रहे हैं और अनिर्वचनीय सुख का अनुभव कर रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट