सुखस्वरूप रघुबंसमनि मंगल मोद निधान

दोहा २०० · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

सुखस्वरूप रघुबंसमनि मंगल मोद निधान। तेसोवत कुस डासि महि बिधि गति अति बलवान॥ २०० ॥

अर्थ

जो सुखस्वरूप रघुवंशमणि, मंगल और मोद के निधान श्रीरामचन्द्रजी कुशा बिछाकर पृथ्वी पर सोते हैं। विधाता की गति बड़ी ही बलवान् है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का दोहा २०० है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन