सुख हरषहिं जड़ दुख बिलखाहीं

चौपाई ४, दोहा १५० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुख हरषहिं जड़ दुख बिलखाहीं। दोउ सम धीर धरहिं मन माहीं॥ धीरज धरहु बिबेकु बिचारी। छाड़िअ सोच सकल हितकारी॥ ४ ॥

अर्थ

मूर्ख लोग सुख में हर्षित होते और दुःख में रोते हैं, पर धीर पुरुष अपने मन में दोनों को समान समझते हैं। धीरज धरिये, विवेक विचार कर शोक छोड़ दीजिये, जो सबके हितकारी है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान