जनम मरन सब दुख सुख भोगा
जनम मरन सब दुख सुख भोगा
चौपाई ३, दोहा १५० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जनम मरन सब दुख सुख भोगा। हानि लाभु प्रिय मिलन बियोगा॥ काल करम बस होहिं गोसाईं। बरबस राति दिवस की नाईं॥ ३ ॥
अर्थ
जन्म-मरण, सुख-दुःख के भोग, हानि-लाभ, प्रियजनों का मिलना-बिछुड़ना—ये सब, हे गोसाईं! काल और कर्म के वश रात-दिन की तरह बरबस होते रहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान